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मैनाटाँड़:- सीपीआई प्रवासी मजदूर और गरीब जनता की दुर्दशा पर किया विरोध



मु० की शान संवाददाता अमित सागर

   अमित कुमार की रिपोर्ट

मैनाटाँड़ पश्चिमी चंपारण। हजारों मजदूर का काम धंधा छिन जाने से दाने-दाने को मोहताज हो गए। उनके पास खाने को खाना नहीं, अपने घर पहुंचने के लिए पैसा नहीं। अपने परिवार को गुजर-बसर करने उनके लिए मुश्किल हो रहा है। इन सब के बावजूद सरकार उनकी बदहाली को नजरअंदाज कर रही है। इन्हीं सब मांगों को लेकर धरना पर बैठे सीपीआई के अंचल सचिव खलीकुज्जमा ने बताया कि प्रधानमंत्री की ओर से की गई 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा और वित्त मंत्री द्वारा इनके खर्च की विवरण सिर्फ राजनीतिक लफ्फाजी के सिवाय कुछ नहीं है। उनके पास कोरोना से पैदा हुए संकट से निपटने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। मोदी सरकार की नव-उदारवादी नीतियों के वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था बीमार पड़ गई है, और डूब रही है। जिसे कोरोना के महामारी ने और बढ़ गई है। इस वक्त में लोगों को असहाय और हताश मालूम नहीं होने देना चाहिए, इसलिए केंद्र सरकार की इस निष्ठुरता ताको खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया है। खलीकुज्जमा ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए अधिक ट्रेनें और बसें चलाई जाए जिसमें खाना और पानी का सुविधा हो। सभी मजदूरों को दस हजार यात्रा भत्ता के रूप में दिया जाए। मनरेगा को कमजोर ना किया जाए। मनरेगा के तहत हो रहे काम को और बढ़ाई जाए, प्रत्येक परिवार के सभी व्यस्क सदस्यों को समय पर भुगतान किया जाए। सरकारी क्षेत्रों में रोजगार और आवास की गारंटी दी जाए। राशन देने के लिए किसी भी तरह का शर्त ना रखी जाए। श्रम कानून के साथ कोई छेड़छाड़ ना की जाए। बुजुर्गों, विधवाओं और शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए पेंशन और दूसरी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यही सब निम्न मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया। मौके पर लक्ष्मण राम, हरिलाल राम, हकारी देवी, गोदामों देवी, राधाकृष्ण राम, संत साह, प्रभु गिरी आदि दर्शना अधिक कार्यकर्ता लोग मौजूद रहे।

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