50 से ऊपर के अक्षम कर्मियों को दी जाएगी अनिवार्य सेवानिवृत्ति, गृह विभाग में बनी दो समिति
पचास वर्ष से ऊपर के सरकारी सेवकों के कार्यकलापों की समीक्षा के लिए गृह विभाग में समिति का गठन कर दिया है। यह समिति इस उम्र सीमा से अधिक के अधिकारियों-कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा करेगी। यदि कोई सेवा में बनाए रखने के लायक नहीं होगा तो समिति द्वारा अनिवार्य सेवानिवृत्ति की अनुशंसा नियुक्ति प्राधिकार से की जाएगी। इस बाबत कार्यालय आदेश जारी कर दिया गया है।
दो समितियों का हुआ गठन
गृह विभाग के 50 वर्ष से ज्यादा के सरकारी सेवकों के कामकाज की समीक्षा के लिए दो समितियों का गठन किया गया है। समूह ‘क’ के सरकारी सेवकों के कार्यकलाप की समीक्षा के लिए बनी समिति के अध्यक्ष गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव होंगे। वहीं, सदस्य के तौर पर विभागीय सचिव, विशेष सचिव (आईपीएस) और विभागीय मुख्य निगरानी पदाधिकारी इसमें शामिल किए गए हैं। समूह ‘ख’, ‘ग’ और अवर्गीकृत के सरकारी सेवकों के कामकाज की समीक्षा के लिए अलग समिति बनाई गई है। इस समिति के अध्यक्ष गृह विभाग के सचिव बनाए गए हैं। वहीं, गृह विभाग के संयुक्त सचिव सह मुख्य निगरानी पदाधिकारी और विभाग के अवर सचिव (आरक्षी या विशेष शाखा) को सदस्य के तौर पर इसमें रखा गया है।
जुलाई 2020 में जारी हुआ था संकल्प
सामान्य प्रशासन विभाग ने 50 वर्ष से ऊपर के सरकारी सेवकों के कामकाज की समीक्षा करने को लेकर 23 जुलाई, 2020 को संकल्प जारी किया था। इसके तहत इस उम्र सीमा में आनेवाले वैसे सरकारी सेवक, जिनकी कार्य दक्षता या आचार ऐसा नहीं है, जिससे उन्हें सेवा में बनाए रखना न्याय या लोकहित में नहीं हो, के कार्यकलाप की समीक्षा कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति की अनुशंसा करनी है। इसी के मद्देनजर गृह विभाग के अधीन दो समितियों का गठन किया गया है। गृह विभाग ने अपने अधीन सभी कार्यालयों में भी उक्त संकल्प के तहत समिति का गठन करने का निर्देश दिया है।

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