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बच्चे का इलाज कराने बिहार से जा रहे थे दिल्ली, इलाहाबाद में उतर गया मासूम, अब 5 साल बाद दंपति को मिला खोया बेटा

 



आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो ड्यूटी को केवल नौकरी नहीं, जिम्मेवारी समझकर पूरा करने का प्रयास करते हैं। ऊपर से ड्यूटी अगर सामाजिक सरोकार से जुड़ी हो तो जिम्मेवारी और भी बढ़ जाती है। ड्यूटी को पूरी जिम्मेवारी के साथ निभाने का एक और उदाहरण पेश किया है जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार झा ने। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति से एक मानसिक रूप से दिव्यांग बालक जो अपना नाम-पता भी ठीक से नहीं बता पा रहा था, पांच साल बाद अपने माता-पिता से मिला। 

दरअसल, करीब पांच वर्ष पूर्व सहरसा जिले के घोघेपुर निवासी शंकर मुखिया अपने 12 वर्षीय मंदबुद्धि पुत्र ननकू मुखिया को इलाज कराने दिल्ली ले जा रहे थे। ट्रेन में उनकी आंख लग गयी। इसी बीच उनका बेटा इलाहाबाद से पहले किसी स्टेशन पर उतर गया। इलाहाबाद पहुंचने पर उन्होंने बहुत खोजबीन की, लेकिन बच्चे का कहीं पता नहीं चला। थक-हार कर उन्होंने बेटे के मिलने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। लेकिन, आखिरकर बाल कल्याण समिति, दरभंगा की पहल पर उन्हें अपना खोया बेटा मिल गया। 

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार झा ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व इस बालक को रेल चाइल्डलाइन ने पटना बाल कल्याण समिति को सौंपा था। बच्चा मंदबुद्धि होने के कारण सही नाम-पता नहीं बता पा रहा था। पर उसने कई बार कुशेश्वरस्थान और बिथान का नाम लिया। इस आधार पर उसे 25 जुलाई 2019 को दरभंगा बाल कल्याण समिति को ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद बच्चे के माता- पिता को खोजने की पूरी कानूनी प्रक्रिया की गयी, पर कोई पता नहीं चल पाया। अंत में अब बच्चे को लीगल फ्री करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही थी। 

इसी बीच गत एक फरवरी को बैठक के दौरान समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र झा ने टीम के सामने स्वयं के स्तर से एक बार प्रयास करने का प्रस्ताव रखा। इसी के तहत वे टीम के साथ छह फरवरी को बच्चे को लेकर कुशेश्वरस्थान पहंुचे। वहां पहुंचकर कुशेश्वरस्थान पूर्वी के बीडीओ एवं स्थानीय थाना के सहयोग से उन्होंने खोजबीन शुरू की। खोज करते करते जब वे भिण्ड़ुआ गांव पहुंचे तो वहां एक महिला ने इस बालक को पहचान लिया। रिश्ते में बच्चे की भाभी लगने वाली महिला ने ही इसका घर सहरसा जिले के घोघेपुर और पिता का नाम शंकर मुखिया होने की जानकारी दी। इसके बाद बच्चे के माता-पिता को सूचित किया गया। 

बच्चे के माता-पिता ने कुशेश्वरस्थान पहुंचकर बीडीओ के सामने साक्ष्य प्रस्तुत किया। बीडीओ ने साक्ष्य को सत्यापित किया। इसके बाद उनके माता-पिता रविवार को दरभंगा पहुंच गए। रविवार को छुट्टी होने के वाबजूद बाल कल्याण समिति द्वारा उनके रहने- खाने की व्यवस्था की गयी। अंतत: सोमवार को बच्चे को माता- पिता के सुपुर्द किया गया। बच्चे के घर तक जाने की व्यवस्था भी बाल कल्याण समिति द्वारा की गयी। इस कामयाबी पर बच्चे एवं उसके माता-पिता के साथ साथ बाल कल्याण समिति की पूरी टीम के चेहरे पर खुशी झलक रही थी। समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र झा ने इस पूरे अभियान में सफलता के लिए कुशेश्वरस्थान पूर्वी के बीडीओ, स्थानीय थाना, जिला बाल संरक्षण इकाई की सहायक निदेशक नेहा नूपुर, बाल कल्याण समिति की सदस्य रेणु कुमारी, प्रीति कुमारी, इंद्रा कुमारी आदि के प्रति आभार प्रकट किया।

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