बिहार: 5वीं की छात्रा से रेप करने वाले प्रिंसिपल को फांसी, जानें बेटी को इंसाफ दिलाने की जंग की पूरी कहानी
बिहार की राजधानी पटना में एक मां ने 5वीं
कक्षा में पढ़ने वाली बेटी से रेप करने वाले हैवान प्रिंसिपल को फांसी की
सजा दिला ही दी। जानें बेटी को इंसाफ दिलाने की जंग लड़ने वाली मां की पूरी
कहानी। ...टूटी कमर, सिर पर छत नहीं, अपनों ने मुंह फेरा और हर दिन जान
मारने की धमकी। इसके बावजूद बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए हिम्मत न हारने की
कहानी है फुलवारीशरीफ दुष्कर्म पीड़िता की मां का। पटना शहर में रहकर
बच्चों को पढ़ा रही मां के पैरों तले उस दिन जमीन खिसक गई, जब मासूम बच्ची
के साथ हैवानियत की खबर मिली।
पीड़िता की मां ने आरोपितों को सजा मिलने के बाद चैन की सांस ली। मुख्य
आरोपित को सजा ए मौत के फैसले की खबर सुनते ही आंखों से खुशी के आंसू छलक
पड़े। कहती हैं, मां सारे दु:ख-दर्द सह लेती है, लेकिन जब अपने बच्चे पर
मुसीबत देखती है तो पूरी कायनात से लड़ जाती है। वह अक्सर बीमार रहती थी।
कमर से लाचार होते हुए भी बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए थाना, कोर्ट और
अस्पताल का चक्कर लगाती रही। तीन महीने तक कमर पर पट्टी लगाकर बेटी के लिए
दौड़ती रहीं। यहां तक कि अपनों ने भी मुंह मोड़ लिया। जिस किराये के घर में
रहती थी वहां से निकाल दिया गया। लगातार आरोपितों के परिवार द्वारा जान से
मारने की धमकी मिल रही थी। बेटी की जान बचाने के लिए पटना छोड़ दी। परिवार
वाले उसे ही गलत कहने लगे। दूसरों से कर्ज लेकर घर चलाती रही, लेकिन बेटी
को इंसाफ दिलाने के लिए जी-जान से जुटी रही।
दो साल पहले आज ही के दिन हुई थी पुष्टि
फुलवारी रेपकांड में दो साल पहले आज के ही दिन (15 फरवरी) डीएनए जांच की
रिपोर्ट आई थी। इसमें पुष्टि हुई थी कि अरविंद कुमार ही आरोपित है। इसके
बाद पॉक्सो कोर्ट से इंसाफ की आस जागी। मां ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
उस समय से राजधानी से बाहर रहकर बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए वह लड़ती रही।
वह कहती हैं, आज उनकी बेटी नहीं बल्कि उन तमाम बेटियों को इंसाफ की आस जगी
है, जिनके साथ दरिंदगी हुई है।
भाई को मारने की धमकी देकर प्राचार्य करता था रेप
पीड़िता की मां ने बताया कि दोषी प्राचार्य अरविन्द कुमार उर्फ राज
सिंघानिया पीड़िता के छोटे भाई को जान से मारकर स्कूल में गाड़ देने की धमकी
देता था। इससे पीड़िता काफी डर गई। जिस दिन प्राचार्य उसके साथ गलत करता।
वह घर आकर छोटे भाई से लिपटी रहती थी। मां भाई से प्यार समझ रही थी। होठों
की मुस्कान में बेटी ने दर्द जाहिर नहीं होने नहीं दिया।

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