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नरसंहार व हत्या का कोई भी व्यक्ति समर्थन नही करेगा जो जाति आधारित वोट बैंक के रूप में देखते हो वो ही करेगा:श्याम रजक

 



पटना।. एक दैनिक समाचार पत्र में जदयू के द्वारा सेनारी कांड पर राज्य सरकार के निर्णय के स्वागत का वक्तव्य देखा और उन्होंने राजनीति के चश्मे से जातिवाद दृष्टिकोण दर्शित किया है। मैं तो स्वागत के साथ सरकार के नजरिये पर प्रश्न चिन्ह खड़ा किया था कि बिहार में सभी जाति धर्म को एक नजरिये से देखना चाहिए। न कि पक्षपात दिखाई दे। नरसंहार व हत्या को कोई भी व्यक्ति समर्थन नहीं करेगा जो जाति आधारित वोट बैंक के रूप में देखते हो वो ही करेगा। 

लक्ष्मणपुर वाथे, मियांपुर, शंकर विहार, बथानी टोला, बेलछी, तिसखोड़ा सहित नरसंहार के दोषियों को वरी किये जाने के विरुद्ध सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यूँ नहीं गयी।

? साथ ही जस्टिस अमीर दास आयोग को भंग करना क्या जातीय विद्वेष नहीं झलकता है। 

जदयू के इस वक्तव्य से स्पष्ट हो गया कि जदयू के लिए दलित, पिछड़ो, महादलित, अल्पसंख्यक सिर्फ वलि का बकरा है क्या? वे मनुवादियों के नजर में अविकसित व अन्याय सहने के लिए ही है। 

इस नजरिये को शायद मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार सहित तमाम दलित-पिछड़े जन प्रतिनिधि संग्यान लेगे। तथा सभी जन प्रतिनिधि व जागरूक बहुजन इसका प्रतिवाद करें। यही मेरा आग्रह है।

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