मुजफ्फरपुर के शरद में टोक्यो में रचा इतिहास ,पैरालंपिक में हाई जम्प कर कांस्य पदक देश के नाम किया .
मुजफ्फरपुर:- जिले के मोतीपुर के लाल शरद ने टोक्यो में चल रहे पैरालंपिक में जिले वासियों की मुरादें पूरी कर दीं। उसने जिले ही नहीं राज्य और देश का नाम भी रोशन किया है। शरद ने (टी-42) हाई जंप इवेंट में 1.83 मीटर ऊंची छलांग लगाकर यह पदक अपने नाम किया।
जैसे ही शरद के पदक जीतने की घोषणा हुई, मुजफ्फरपुर के लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। खेल प्रेमियों की खुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं था। सभी खुशी से झूम उठे।
शरद मोतीपुर के कोदरकट्टा के रहने वाले हैं। हालांकि, उनका परिवार अभी पटना में रहता है। उनके पिता सुरेंद्र कुमार ने कहा कि मेरा बेटा पैरालंपिक में सफल होगा, इसकी मुझे पूरी आशा थी। उन्होंने कहा कि मुझे बेहद खुशी है कि मेरे बेटे ने कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
शरद एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल और एक बार लंदन वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीत चुके हैं। पटना में 2017 में राज्य खेल सम्मान में बिहार सरकार की तरफ से पुरस्कृत भी किया जा चुका है।
क्रिकेट खेलने के थे शौकीन
बताया जाता है कि दार्जिलिंग में स्कूलिंग के दौरान दोस्तों को क्रिकेट खेलते देख उन्हें भी बहुत मन होता थे। वे खेलते भी थे। क्रिकेट खेलने का शौक हो गया। इसी दौरान कुछ लड़कों को हाई जम्प करते देखा। फिर उन्होंने भी हाई जम्प लगाना शुरू कर दिया।
1.30 मीटर लगाया हाई जम्प
स्कूल में उन्होंने 1.30 मीटर हाई जम्प लगाया। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। इस दौरान अपनी प्रतिभा को दबने नहीं दिया। कॉलेज में भी हाई जम्प में नए-नए कीर्तिमान स्थापित करते गए। वहां से फिर JNU में MA की पढ़ाई करने गए। इसी दौरान एशियन गेम्स जीता था। शरद ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) में ट्रेनिंग ली है। वे ट्रेनिंग करने कई बार विदेश भी जा चुके हैं।
जन्म के 18 माह में ही पड़ा था पोलियो अटैक .
शरद का जन्म मुजफ्फरपुर के मोतीपुर प्रखंड के कोदर कट्टा गांव में वर्ष 1989 में हुआ. जन्म के 18 महीने के बाद ही शरद को पोलियो का अटैक हुआ, जिससे उनका बायां पैर डैमेज हो गया. लेकिन, शरद ने अपनी इस कमजोरी को ही अपनी ताकत बनायी और कभी मायूस नहीं हुए.और अभी इस कीर्तिमान पर पहुँच चुके है .

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