4 साल की बच्ची के साथ कुकर्म के आरोपी को 2 दिनों में सुनाई सजा, 3 साल की कैद
कोर्ट में मामला मतलब-तारीख पर तारीख। लेकिन, लीक से जरा हटके फैसले सुनाने के लिए प्रसिद्ध रहे किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी ने शनिवार को महज दो दिनों में अहम फैसला सुनाया। प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र ने अप्राकृतिक यौनाचार मामले में किशोर को अधिकतम दी जाने वाली तीन साल की सजा सुनाकर समाज को एक नया संदेश दिया है। नालंदा जिले के लिए यह ऐतिहासिक क्षण था, जब सबसे कम समय में यह फैसला सुनाया गया।
मामला नालंदा थाना क्षेत्र का है। वहां आठ अक्टूबर 2021 को चार साल की मासूम से गांव के ही एक किशोर ने अप्राकृतिक यौनाचार की घटना को अंजाम दिया था। फैसले पर परिषद की सदस्य उषा कुमारी ने भी सहमति दी। पीड़ित के परिजन ओर से पैरवी कर रहे सहायक अभियोजन पदाधिकारी जय प्रकाश ने आरोप गठन होते ही वरीय पुलिस अधिकारियों की मदद से सभी गवाहों को शुक्रवार को कोर्ट में बुलाकर गवाही करायी। इसके बाद किशोर का बयान लेकर बहस पूरी की। शनिवार को कोर्ट ने किशोर को दोषी पाते हुए सजा सनायी।
किशोर न्याय परिषद की सदस्य उषा कुमारी ने बताया कि नालंदा थाना क्षेत्र के एक गांव में 14 वर्षीय किशोर ने चार साल की बच्ची को इमली और चॉकलेट देने के बहाने घर में बुलाकर उससे अप्राकृतिक यौनाचार किया। थाने में मामला दर्ज होने के बाद 25 नवंबर को पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल की गयी। सभी पांच लोगों की गवाही के बाद महज दो दिनों में न्यायाधीश मानवेंद्र मिश्र ने किशोर को सजा सुनाई।
जज मानवेंद मिश्र ने अपने फैसले में कहा- ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ (जहां नारी की पूजा की जाती है वहां देवता निवास करते हैं)। कन्या पूजन की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है। वहीं, नारी के अपमान का बदला लेने के लिए भगवान राम दूसरे देश में जाकर रावण को समूल नष्ट कर दिया था। चीरहरण का बदला लेने के लिए अपने भाइयों से भी महाभारत जैसे भीषण युद्ध करने का प्राचीन इतिहास मौजूद हो, उस देश में किशोरों में ऐसी पशु प्रवृत्ति आना निश्चित रूप से समाज के लिए चिंता का विषय है। ऐसी प्रवृत्ति को रोकने के लिए तथा किशोरों में महिलाओं के प्रति सम्मान विकसित करने के लिए हमें अपनी समाज में जागरूकता लानी होगी।
डीएसपी ममता कुमारी ने कहा कि त्वरित न्याय मिलने से लोगों में पुलिस व न्यायालय के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। जिस तरह न्यायाधीश मानवेन्द्र मिश्र ने महज दो दिनों में फैसला सुनाया है उससे समाज में एक नया संदेश जाएगा।
किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र प्रतिभावान आरोपित किशोर को आगे भी प्रतिभा निखारने का भरपूर अवसर देते रहे हैं। वहीं बच्चों के साथ किए जाने वाले कुकृत्य व जघन्य अपराधों में साक्ष्य मिलने पर अधिकतम दंड दिलाने में भी सख्त रहे हैं। ‘त्वरित न्याय, सच्चा न्याय’ की अवधारणा को मजबूती प्रदान करते हुए श्री मिश्र ने इस मामले में भी आरोपित को कानूनी प्रावधान के तहत अधिकतम सजा सुनायी।
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