बिहार में इस स्कीम के तहत गरीबों को मिलेगा मुफ्त राशन, परिवार के हर सदस्य को 5 किलाे अनाज
बिहार के गरीबों को लगभग 17 लाख टन अनाज फिर से मुफ्त में दिया जाएगा। केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का दूसरी बार विस्तार कर दिया है। अब यह योजना 31 मार्च तक चलेगी। इसके पहले कोरोना काल में शुरू हुई इस योजना का विस्तार छठ तक किया था। लिहाजा इसी महीने इसकी अवधि समाप्त हो रही थी।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत हर गरीब परिवार के हर सदस्य को पांच किलो अनाज मुफ्त में दिया जाता है। लिहाजा राज्य में हर महीने 4.35 लाख टन अनाज मुफ्त में बांटा जाता है। इसमें 2.57 लाख टन चावल और 1.74 लाख टन गेहूं होता है। लाभुकों की संख्या 8.71 करोड है। खास बात यह है कि मुफ्त मिलने वाला यह अनाज हर महीने पीडीएस दुकानों से कोटे के अनुसार मिलने वाले राशन से अलग है। इस हिसाब से अगले चार महीने में एफसीआई को लगभग 17 लाख टन अतिरिक्त अनाज की व्यवस्था करनी होगी। संस्था ने पीएम की घोषणा के साथ ही इस पर काम शुरू कर दिया है।
सरकार ने गत वर्ष के कोरोना लहर में ही यह व्यवस्था की थी। अप्रैल 2020 में शुरू हुई योजना नवम्बर तक चली। उसके बाद दूसी लहर शुरू हुई तो मई 21 में योजना को फिर शुरू किया गया। इसे भी नवम्बर तक ही चलना था लेकिन सरकसार ने मार्च 22 तक विस्तार कर दिया। अब तक इस योजना के मद में लगभग 66 लाख टन अनाज बांट चुकी है। इसमें 39 लाख टन चावल और 26 लाख टन गेहूं बांटा गया है। औसत समर्थन मूल्य के हिसाब से जोडें तो सरकार कोराना काल में अब तक 720 करोड रुपये का अनाज मुफ्त बांट चुकी है।
उधर विस्तार के बाद केन्द्र ने राज्य सरकार का आवंटन बढ़ा दिया है। जिलों के लाभुकों की संख्या के हिसाब से वितरण राज्य सरकार को करना है। केन्द्र सरकार पहले 8.57 करोड लाभुकों के लिए ही अनाज देती थी। गत वर्ष छुटे हुए लाभुकों को जोड़कर केन्द्र ने 8.71 करोड लाभुकों के लिए अनाज देने की मंजूरी दे दी है।
एफसीआई के अनुसार इस अनाज के भंडारण के लिए ना तो गोदाम की कमी है और ना ही गोदाम में अनाज की कोई कमी नहीं है। इसके अलावा राज्य सरकार के पास भी पर्याप्त मात्रा में अनाज का भंडारण है। सभी अनाज का उपयोग केन्द्र की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए ही किया जाना है। अनाज वितरण के साथ गोदाम भी खाली होंगे जिनका उपयोग इस साल की धान खरीद में किया जाएगा।
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