न पीऊंगा और न पीने दूंगा... शराबबंदी पर बिहार DGP एसके सिंघल ने दिलाई पुलिसवालों को शपथ
बिहार में सभी सरकारी विभागों के प्रधान व कर्मियों सहित पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों व पुलिसकर्मियों ने शराब नहीं पीने की शपथ ली। बिहार नशामुक्ति दिवस के मौके पर पुलिस मुख्यालय पटेल भवन में पुलिस महानिदेशक, बिहार एसके सिंघल ने सभी अधिकारियों व पुलिसकर्मियों व अन्य कर्मियों को आजीवन शराब नहीं पीने की शपथ दिलाई।
डीजीपी ने दैनिक जीवन में शराब से संबंधित किसी प्रकार की गतिविधि में शामिल नहीं होने एवं शराबबंदी को लागू करने के लिए अपेक्षित विधि सम्मत कार्रवाई करने की भी शपथ दिलायी। शपथ लेने वाले सभी अधिकारियों व कर्मियों द्वारा इस आशय का शपथ पत्र भी दिया गया। इस अवसर पर सभी अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
पटना पर काबू पा लेंगे तो पूरा बिहार ठीक हो जाएगा : CM नीतीश
पटना शहर में सबसे ज्यादा गड़बड़ करता है। यहां पकड़िएगा ठीक से तो बाकी जगहों पर कोई हिम्मत नहीं करेगा। अब कार्रवाई शुरू किये हैं तो यह आखिरी नहीं है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के पदाधिकारियों से साफ तौर पर कहा कि पटना में काबू कर लीजिएगा तो पूरा बिहार नियंत्रित हो जाएगा। मुख्यमंत्री ज्ञान भवन में नशा मुक्ति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब नहीं पीने की सबने शपथ ली है, इसे भूलिएगा नहीं। इसके प्रति प्रतबद्धता रहे, यह ध्यान रखें। यह राज्य के हित में होगा। बिहार में शराबबंदी सफल होगी तो धीरे-धीरे और जगहों पर भी होगा। आगे उन्होंने कहा कि कोरोना के पहले शराबबंदी को लेकर कई जगहों पर हम लोगों के बुलावे पर गये। केरला में गये। वहां के लोग 22 साल से अभियान चला रहे थे। हमने वहां बताया था कि बिहार में शराबबंदी के बाद आने वाले पर्यटकों की संख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। यह बिल्कुल भ्रम है कि शराबबंदी से पर्यटकों की संख्या में कमी आती है।
हाल की घटना की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दारू पीया, इसलिए मरा। जो दारू पीने गये उसे खराब दारू मिला। कुछ लोग चिंता प्रकट कर रहे थे कि खराब दारू मिला। तो क्या अच्छा दारू मिलना चाहिए था? इसका मतलब उनके अनुसार दारू मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक-एक आदमी को समझना चाहिए कि दारू नहीं पीयें। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सर्व सम्मति से पारित हुआ। सबलोगों ने एकजुट होकर बात कही। अभी कुछ लोगों की बात सुनते हैं तो आश्चर्य होता है। आखिर गड़बड़ बयान देने का मतलब क्या हैं? यह सब दिमाग में है क्या कि शराब मिल जाये।
कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि भूल जाते हैं क्या? शराबबंदी का प्रस्ताव निबंधन एवं उत्पाद विभाग से आया था और इस विभाग के मंत्री किस पार्टी के थे। वर्ष 2016 में बहुत मजबूती के साथ इसके पक्ष में वे लोग बोलते थे। हमसे मिले तो कहा था कि शहरी क्षेत्र वाला काहे अभी छोड़ दे रहे हैं। वहीं अब उस पार्टी का एक-दो आदमी इसके खिलाफ बोलता है तो आश्चर्य होता है। यह कभी नहीं करना चाहिए।
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