भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन: MVI रहे मृत्युंजय कीमती सामान बटोरकर हुए फरार, EOU कर सकती है गिरफ्तार
मोटरयान निरीक्षक (एमवीआई) के पद पर रहते करोड़ों की संपत्ति बनाने वाले मृत्युंजय कुमार सिंह पर भले ही ईओयू (Economic Offences Unit) का शिकंजा कस गया हो पर वह कई कीमती सामान गायब करने में कामयाब हो गए।
मंगलवार को हुई छापेमारी से पहले, सोमवार की शाम ही वह आनन-फानन में अपने आलीशान फ्लैट से कई सामान बटोरकर निकल गए। ऐसी जानकारी मिलने के बाद ईओयू ने अपार्टमेंट की निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी का हार्ड डिस्क जब्त कर लिया है। इसे छानबीन के लिए एफएसएल को भेजा जा रहा है।
ईओयू कर सकती है गिरफ्तार
मृत्युंजय सिंह पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। अमूमन ऐसा होता नहीं है पर जांच में सहयोग नहीं करने और फरार होने के चलते ईओयू उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। ईओयू को जो जानकारी मिल रही है वह कई सवाल भी खड़े कर रही है। छापेमारी से पहले अपनी फार्मेसी कॉलोनी, गोला रोड के आरके सदन अपार्टमेंट स्थित फ्लैट से फरार होने के दौरान दो-तीन छोटी गाड़ियों में सामान भरकर ले जाने की भी बात आई है। फ्लैट की तलाशी के लिए जब ईओयू के अधिकारी पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर वे समझ गए कि जल्दबाजी में सामान हटाया गया है। ऐसे में ईओयू अब मृत्युंजय सिंह को गिरफ्तार करने पर विचार कर रही है। तलाशी के बाद उनके फ्लैट को सील कर दिया गया है।
पिस्टल व गोलियां भी मिलीं
आरके सदन के जिस फ्लैट में मृत्युंजय सिंह रहते हैं वहां की तलाशी मंगलवार रात 2.30 बजे तक चली। इस दौरान 50 हजार के पुराने नोटों के अलावा एक लाइसेंसी पिस्टल और गोलियां भी मिली है। इसे जब्त कर लिया गया है। चूंकि वह अभियुक्त हो गए हैं और सामने नहीं आ रहे ऐसे में उनके पिस्टल के लाइसेंस को रद्द करने की अनुशंसा ईओयू द्वारा की जाएगी।
पटना और अन्य जगहों पर एमवीआई रहते मृत्युंजय सिंह ने जमकर नोट बटोरे। सूत्रों के मुताबिक गाड़ियों को फिटनेस देने में नियमों की अनदेखी करना और ओवरलोड गाड़ियों को खुली छूट देकर उन्होंने महज 9 वर्षों में करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर दी। खासकर बालू लदे ट्रकों पर उनके कार्यकाल में लगाम नहीं लगायी गयी। थोड़ा बहुत कुछ हुआ भी तो वह सिर्फ दिखावे के लिए किया गया। मृत्युंजय सिंह ने कई रसूखदार लोगों से अपने बेहतर ताल्लुक बना रखे थे और इसका भी फायदा उन्होंने तैनाती में उठाया। बालू के अवैध खनन और परिवहन की जांच में संलिप्तता पाए जाने के बावजूद वह निलंबित नहीं हुए हैं, जबकि इस मामले में कई अधिकारियों को पहले ही सस्पेंड कर दिया गया था।
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