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सुहागिन महिलाओं ने पति की दिर्घायु के लिए रखा बट सावित्री ब्रत


बेतिया से घनश्याम की रिपोर्ट

बेतिया । ज्येष्ठ माह की अमावस्या को पीपल एवं बरगद के पेड़ के समीन सोशल डिस्टेन्स का पालन करते हुए सुहागिन महिलाओं ने बट सावित्री ब्रत को रख की पुजा-अर्चना। साथ ही पीपल एवं बरगद के पेड़ में परिक्रमा करते हुए धागा फिरोया तथा अपने पति के दिर्घाआयु की कामना की। बहुततेरे महिलाएं कोरोना वायरस के महाप्रकोप से बचने के लिए अपने-अपने घरों में गमला में पीपी एवं बरगद के पेड़ लगा कर अपने घर में ही पुजा-अर्चना की एवं अपने पति के दिर्घायु की कामना की।  इस संबंध में वेदाचार्य पं॰ अंजली कुमार ने इस ब्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूजा की विधि आदि पर प्रकाश डाला। उन्होने बताया कि बट सावित्री व्रत--आज है वट सावित्री व्रत, जानें क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त। हिंदू धर्म में महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए कई व्रत रखती हैं। ऐसे ही व्रतों में से एक है वट सावित्रि व्रत। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने सुहाग के दीर्घायु होने के लिए व्रत-उपासना करती हैं। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो स्त्री उस व्रत को सच्ची निष्ठा से रखती है उसे न सिर्फ पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि उसके पति पर आई सभी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं। वट सावित्री व्रत शुभ मुहूर्त-अमावस्या तिथि प्रारम्भ  मई 21, 2020 को रात 09ः35 बजे अमावस्या तिथि समाप्त  मई 22, 2020 को रात 11ः08 बजे वट सावित्री व्रत का महत्व-धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थी। अतः इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है। इस दिन वट (बड़, बरगद) का पूजन होता है। इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं। वट सावित्री व्रत भी सौभाग्य प्राप्ति के लिए बड़ा व्रत माना जाता है. ये ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पती की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और बरगद की पूजा करती हैं. हालांकि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण लॉकडाउन की वजह से महिलाएं इस बार पारंपरिक तरीके से धरती पर बरगद के पेड़ के नीचे पूरे गांव, टोले, मोहल्ले के साथ एकत्रित होकर पूजा करती थी लेकिन इस बार बहुत कम महिलाएं ही कर सकी।  ज्दातर महिलाएं पूजन की व्यवस्था अपने घरेलू गार्डन में छत पर ही कर रखा है जिसकी उपयोगिता आज दृष्टिगत हो रही है। यह ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र छठ व्रत की पूजा का आयोजन की व्यवस्था प्रायः घरों के छतों पर की जाती है । लगता है अब आने वाले समय अभी से करबट ले लिया है हम सभी को तदनुसार ढ़ालना होगा।

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