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घोड़ासहन:- प्रेम प्रसंग में बेटी ने ही करायी थी पिता की हत्या

 


घोड़ासहन | प्रेम में अंधी हुई रामबाबू जायसवाल की दूसरी बेटी रीना ने ही अपने प्रेमी से मिल कर पिता की हत्या करा दी थी। घटना थाना क्षेत्र के बंगरी ग्राम में विगत 23 नवम्बर की रात हुई थी ।

थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार मिश्र के नेतृत्व में पुलिस ने इस हत्या की गुत्थी सुलझाते हुए प्रेमी उपेन्द्र राय को अहमदाबाद से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार प्रेमी बंगरी ग्राम के ही उपेन्द्र राय ने अपने स्वीकारोक्ति में पुलिस के समक्ष सारे घटनाक्रम का खुलासा कर दिया। उसने बताया कि 2014 में जब अपनी पत्नी की हत्या के मामले में रामबाबू जायसवाल जेल में थे,उस समय बेटी रीना को गवाही के लिए उपेन्द्र राय ही कोर्ट ले जाता था। इसी क्रम में दोनों के बीच प्रेम पनपा और वे गांव में एकदूसरे से मिलने लगे। गांव में इस प्रेम की चर्चा होने के बाद दोनों के बीच मोबाइल पर बातें होने लगी। 2020 में रामबाबू जयसवाल ने बेटी की शादी नेपाल के बसंत पट्टी गांव में तय कर दी तो प्रेमी युगल बेचैन हो गये और इस शादी को टालने की साजिश में जुट गये। रीना नहीं चाहती थी कि उसकी शादी कहीं और हो। इसके लिए वह लगातार उपेन्द्र पर दबाव बना रही थी। दोनों ने आपस में तय किया कि शादी के पहले रामबाबू जायसवाल की हत्या कर दी जाय और बसंत पट्टी में शादी के हो जाने के बाद रीना भाग कर उपेन्द्र राय के पास अहमदाबाद चली जाएगी। इस हत्या के लिए उपेन्द्र राय ने एक पिस्टल खरीदी। 23 नवम्बर की रात गांव में ही बाइक के साथ मठ के निकट घात लगा कर खड़ा था। फोन कर रामबाबू जयसवाल को बुलाया और काफी नजदीक से गोली मार कर उनकी हत्या कर दी। इधर रीना की शादी घोड़ासहन के कुरनिया माई मंदिर में कर दी गयी। रीना के ससुराल वाले उसे लेकर छत्तीसगढ़ चले गये जहां से पिछले जनवरी में वह भाग कर अहमदाबाद उपेन्द्र राय के पास पहुंच गयी। पूर्व से शादीशुदा उपेन्द्र ने रीना के लिए किराये का अलग मकान ले लिया। इसकी सूचना मिलते ही घोड़ासहन पुलिस के पुअनि रामाशंकर सिंह, महिला कांस्टेबल कल्याणी भारती व रूपा कुमारी, चौकीदार गोपाल पंड़ित व बुन्नीलाल पासवान ने गुजरात पुलिस के सहयोग से मोटेरा स्टेडियम के निकट से उपेन्द्र को गिरफ्तार कर लिया जबकि रीना पकड़ में नहीं आ सकी।

क्या था मामला : बंगरी ग्राम में रामबाबू जयसवाल की दूसरी बेटी की बारात 25 नवम्बर को आने वाली थी। 23 नवम्बर की रात पूजा मटकोर का कार्यक्रम था और सारा परिवार इसकी तैयारियों में जुटा था। 45 वर्षीय रामबाबू जयसवाल के लिए पूजा में बतौर यजमान बैठे थे। इसी बीच करीब साढ़े नौ बजे उनके मोबाइल पर किसी ने कॉल किया और वे गांव के ही प्रभु प्रसाद के साथ बाइक से उससे मिलने के लिए चले गये। । गांव में ही उनके घर से कुछ दूरी पर मठ के निकट पहले से घात लगाये अपराधियों ने उनके सीने में गोली मार दी। चिकित्सा के लिए मोतिहारी ले जाने के क्रम में उनकी मौत हो गयी। कुन्दन जयसवाल ने इस मामले में अगले दिन प्राथमिकी दर्ज करायी थी।

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