मंच से गिरिराज सिंह के विवादित बोल, कहा- अधिकारी नहीं सुनते हैं तो बांस से मारो
अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह ने भरे मंच से अधिकारियों को मारने पीटने की बात कह दी है। शनिवार को बीजेपी के फायरब्रांड नेता अपने संसदीय क्षेत्र में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अगर अधिकारी नहीं सुनते हैं तो उन्हें बांस से मारो। हम किसी अधिकारी के नाजायज नंगा नृत्य को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह शनिवार को सिहमा गांव में आयोजित किसान संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। यहां पर मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा, 'सांसद, एमएलए, डीएम, एसपी, वीडियो और डीडीसी, ये आपके अधीन हैं। आप अपनी अच्छी बात लेकर के जाएं। यहां एक मित्र ने लिख कर दिया कि सीओ गड़बड़ कर रहे हैं। मैंने एसडीओ को दिया कि देखिए। आप जाएं। ये बात गिरिराज को कहने की जरूरत नहीं है। ये आपका अधिकार है। आपके अधिकार का हनन होगा तो गिरिराज आपके साथ खड़ा रहेगा क्योंकि आपने मुझे सांसद बनाया है। आपने किसी को एमएलए और किसी को जिला परिषद बनाया है। आपके बल पर कोई मुखिया है। आप मुखिया, एमएलए या एमपी के बल पर नहीं हैं। नहीं सुनते हैं तो बांस से मारो। अधिकारी नहीं सुन रहे हैं... यह मैं सुनना नहीं चाहता। ना हम नाजायज करेंगे और ना नाजायज बर्दाश्त करेंगे। ना हम किसी अधिकारी को नाजायज काम करने के लिए कहते हैं और ना हम किसी अधिकारी के नाजायज नंगा नृत्य को बर्दाश्त कर सकते हैं।'
इसके अलावा, किसान संगोष्ठी में बोलते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि समय बीतने के साथ जोत की जमीन प्रति व्यक्ति घटी है। आज 10 से 20 प्रतिशत किसानों के पास ही 10 से 20 बीघा जमीन है। जो किसान जानवर पालते हैं वो धान की जगह चारा लगाएं। कोशिश रहेगी कि ऐसे किसानों की आमदनी एक नहीं दो लाख हो।
गिरिराज सिंह ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ऊपर जो आपलोगों का भरोसा तथा विश्वास है उसे कभी टूटने नहीं देंगे। बरौनी फर्टिलाइजर के साथ मिलकर ऐसी योजना बनाई है, जहां दो वर्षो में किसानों के पास अपनी गाय, खेत तथा खाद होगी तथा किसान अपने खेत में गैर रसायनिक खाद का उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि ढाई रुपये किलो मक्का उत्पादन करने के बजाय किसान हरा चारा खरीदें। धान-गेहूं से कितनी आमदनी होती है हमें पता है। इसलिए हमारे किसान तिलहन, दलहन, फल-सब्जी की खेती करें।

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