छपरा:- International Women's Day: महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी डॉ मधुप्रभा, पत्रकारिता से प्रधानाचार्य तक का सफर तय किया
जयप्रकाश महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ मधुप्रभा महिला सशक्तिकरण की एक बेहतर मिसाल है। कॉलेज की छात्राओं को रचनात्मक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक , खेल कूद आदि कार्यक्रमों में बेहतर करने की मार्गदर्शन देकर उन्हें जागरूक करती रहती है। तभी तो जेपीएम की छात्राएं जेपीयू समेत दूसरे भी विवि में मेधा का परचम लहराते रहती है। कई बार तरंग व एकलब्य में गोल्ड और सिल्वर मेडल लेकर विवि व कॉलेज को गौरवान्वित की है।
मधुप्रभा बताती है कि वो महाविद्यालय के विकास और छात्राओं के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण के लिए कटिबद्ध हैं । प्रधानाचार्य सांस्कृतिक,शैक्षणिक, खेल कूद आदि प्रतियोगिताओं की पुरस्कार विजेता रही हैं। कोरोना काल में भी वेबिनार ,क्विज़ प्रतियोगिता के आयोजन के लिए इन्हें कोरोना कर्मवीर सम्मान दिया गया ।बिहार राष्ट्र भाषा परिषद,पटना द्वारा साहित्य सेवा सम्मान भी मिला है। इसके अतिरिक्त भी कई सम्मान प्राप्त है।
मधु प्रभा सिंह उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में जन्मीं। उनका पैतृक निवास कैमूर के भभुआ में है। पेशे से पिता डॉ रामाशीष सिंह सरदार वल्लभ भाई पटेल महाविद्यालय,भभुआ में अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष व माता बालिका उच्च विद्यालय,भभुआ में प्रधानाध्यापक थीं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा भभुआ के मिडिल और हाई स्कूल से जबकि उच्च शिक्षा वाराणसी में हुई है। पत्रकारिता में पी.जी.डिप्लोमा किया तथा मुझे टाइम्स ऑफ इंडिया में बतौर संवाददाता के रूप में कार्य करने का ऑफ़र मिला,पर ज्वाइन न कर सकी।
उन्होंने बताया कि पटना वीमेन्स ट्रेनिंग कॉलेज में चयन के बावजूद नामांकन नहीं लेने दिया। अंतत: मेरा विशेष पत्र पत्रकारिता होने के कारण उसी पर मैंने शोध कार्य किया। 1995 में नवंबर में मुझे पी.एच.डी.की उपाधि मिली। 30 नवम्बर 1996 में प्रभाकर सिंह एडवोकेट से शादी हुई। 1996 में ही जेपीविवि के प्राध्यापक के पद पर चयनित हुई। यदुनंदन कॉलेज, दिघवारा में योगदान के बाद दस साल की सेवा पूरी की। तब मुझे प्रधानाचार्य बनाया गया। प्रधानाचार्य के रूप में महेंद्र महिला महाविद्यालय, गोपालगंज में तत्कालीन शिक्षा मंत्री से प्रयास कर काया कल्प किया। महाविद्यालय का चयन मॉडल कॉलेज के रूप में विकसित करने के लिए हुआ। शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के द्वारा छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य किया गया । चुनौतियाँ थी,कटु अनुभव थे;परन्तु उनका डटकर सामना किया । इनका मानना है कि संघर्ष ताक़त देता है। इसके पश्चात ये कमला राय कॉलेज,गोपालगंज मे रहीं। वहॉ भी इन्होंने अनेकानेक रचनात्मक और सुधारात्मक कार्य करवाया। छात्राओं को स्व सुरक्षा का प्रशिक्षण दिलवाया।

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