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गंगा नदी में मिली लाशों पर पटना हाईकोर्ट सख्त, नीतीश सरकार से मांगा जवाब, पूछा- क्या किया गया है

 



बिहार के बक्सर जिले में गंगा घाटों पर लाश मिलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में अब पटना हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कल तक इसका जवाब देने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट में कोरोना महामारी के मामले पर सुनवाई जारी है। इसी क्रम में चीफ जस्टिस संजय करोल की पीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए बक्सर के पास गंगा नदी में पाए गए शवों के संबंध में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

कोर्ट ने नदी में लाश मिलने को परेशान करने वाला करार देते हुए सरकार से जानना चाहा कि इस मामले में क्या किया गया है। एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने अदालत को सूचित किया कि बिहार सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है और बक्सर और कैमूर के जिलाधिकारियों ने यूपी के बलिया और गाजीपुर जिले में अपने समकक्षों से बात की है ताकि ऐसी किसी भी स्थिति की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि बिहार सरकार ने इस मामले में संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा, 'बक्सर और कैमूर में पॉजिटिविटी रेट लगभग 2-3 प्रतिशत है। यूपी के अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान, बक्सर और कैमूर के डीएम, जिन्होंने बलिया और गाजीपुर का दौरा किया, को 'डोम राजा' (श्मशान घाट के प्रभारी) द्वारा सूचित किया गया कि 40 शवों को नदी में फेंक दिया गया था क्योंकि की लोगों ने शव का अंतिम संस्कार नहीं किया। अफसरों के पास उसका वीडियो भी है। बिहार सरकार ने भी नदी में जाल का उपयोग किया है।'

हालांकि, पीठ ने जानना चाहा कि शवों का क्या हुआ और क्या उनका धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। पीठ ने ग्रीन ट्रिब्यूनल का भी हवाला दिया जो नदी में फेंके गए शवों के मामले को देखे। ललित किशोर संबंधित अधिकारियों से इस मामले पर पूरी जानकारी लेने के बाद गुरुवार को हाईकोर्ट में एक विस्तृत जवाब देंगे। केएन सिंह ने कहा कि शवों का पोस्टमॉर्टम करने के बाद उन्हें दफनाया गया क्योंकि उनकी खराब स्थिति के कारण उनके धर्म की पहचान करना मुश्किल था। उन्होंने कहा कि यह पता लगाना भी मुश्किल है कि शव कोविड के शिकार थे या नहीं।

नीतीश कुमार सरकार ने कोर्ट को बताया है कि उसने एक बारह सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी कोविड प्रबंधन के लिए राज्य सरकार को विशेष राय और परामर्श देगी। एम्स के अधिवक्ता विनय कुमार पांडे ने कोर्ट को बताया कि पीएचसी और रेफरल अस्पतालों में ऑक्सीजन की व्यवस्था करना आवश्यक है। ऑक्सीजन के अभाव में मरीज पटना और अन्य शहरों में भाग रहे हैं।

कोर्ट में राज्य सरकार ने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की। सरकार ने इसमें कोरोना को रोकने और मरीजों के इलाज के लिए की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा दिया है। वहीं केंद्र सरकार ने राज्य को और ऑक्सीजन मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। कल भी इस मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

बता दें कि दो दिन पहले बक्सर जिले में गंगा नदी के किनारे एक साथ कई लाशें मिलने से हड़कंप मच गया था। माना जा रहा है कि सभी शव कोरोना संक्रमित मरीजों के हैं। सरकार ने मंगलवार को कहा कि बक्सर जिले में गंगा से अबतक कुल 71 शव निकाले गए हैं। संभावना जताई गई है कि शव का अंतिम संस्कार न करके उन्हें गंगा में प्रवाहित कर दिया गया होगा।

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