वर्षात के पहले सरकारी खजाने की सफाई शुरू। बजरंग सेना राष्ट्रीय संगठन महामंत्री- सह_ बिहार प्रदेश प्रभारी राजेश पाण्डेय ने बिहार सरकार और जिला प्रशासन मुजफ्फरपुर को चेताया।
बरसात से पहले मुजफ्फरपुर शहर के नालों की सफाई के नाम पर एक बार फिर सरकारी खजाने की सफाई शुरू हो गई है। हर वर्ष पानी निकासी के नाम पर नालों के स्लैब तोड़नें एवं कच्चा नाला बनाने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किये जाते हैं। लेकिन, एक घंटे की भी बारिश होनें पर पूरा शहर जलमग्न हो जाता है। दरअसल, पानी निकासी के लिए बने 8 में से 7 Outlet अब भी नाकाम हैं। मानसून सिर पर है लेकिन इनमें से कई आउटलेट से निकासी बंद है, तो कुछ से अत्यंत धीमी गति से पानी निकलता है। ये नाले कहीं गाद, जलकुंभी एवं प्लास्टिक कचरे से भरे पड़ता पड़े हैं तो कहीं लोगों ने अतिक्रमण कर इन्हें अपने कैंपस के अंदर में कर लिया है। शहर के अधिकांश नालों पर स्थायी अतिक्रमण है.नगर निगम शहर में ही नालों के पानी को इधर-उधर घुमाकर निकासी में जुटा रहता है। ऐसे में इस बरसात भी शहर का डूबना तय है। हाल में यास- चक्रवात के दौरान व अन्य दिन की छिटपुट बारिश में पुरानी गुदरी रोड,मिठनपुरा, बीबीगंज, ब्रह्मपुरा, चाँदनी चौक ईलाका, मोतीझील, नयाटोला समेत शहर के अधिकांश इलाकों के लोग इस दंश को झेल चुके हैं। यूँ तो बरसात में शहर के 49 में से तकरीबन 40 वार्डों के अधिकांश मुहल्लों में और सड़क पर जलजमाव होगा ही; पुरानी गुदरी रोड,ब्रह्मपुरा, बीबीगंज, मिठनपुरा, बेला बियाडा इलाके के लोगों को पुनः विगत वर्षों की तरह इस बार भी दुर्दशा झेलनी पड़ेगी है। इन इलाकों से पानी निकलना मुश्किल होगा।क्योंकि अधिकांश नाले मिटटी से लबालब भरे हुए है.बेला-मिठनपुरा इलाके से जिस बेला औद्योगिक क्षेत्र के मन से पानी निकलता है वह पूरी तरह भर चुका है। आधे मन में प्लॉटिंग कर घर बनाए जाने से दीघरा नहर के आउटलेट तक पानी पहुंचना बंद हो चुका है। इसी तरह दामोदरपुर में फरदो नहर तक नाला निर्माण अधूरा होने व सर गणेशदत्त नगर से फरदो नहर तक जगह–जगह अवरोध होने से ब्रह्मपुरा, बीबीगंज के इलाके में जलजमाव होना तय है।नारायणपुर स्टेशन से आगे बेला मन व दीघरा नहर के नीचे साइफन से पानी खेतों में जाता था। मन में घर बन जाने से पानी निकासी बंद है। ऐसे में मिठनपुरा, बेला, बियाडा औद्योगिक क्षेत्र का डूबना तय है।मोतीझील से छाता चौक, खबड़ा होकर फरदो नहर तक नाला गाद से भरा है। पांडेय गली के पास रेल ट्रैक के पास पानी का बहाव काफी कम है। इस वजह से मोतीझील-कल्याणी में जलजमाव हो जा रहा है।गरीबनाथ मंदिर समेत कई इलाकों का पानी चार स्लुइस गेट से नदी में जाता है। सिकंदरपुर मन लबालब है। यहां के 4 Sump house में एक भी चालू नहीं है। स्लुइस गेट से नदी तक नाले पर घर बन जाने से निकासी नहीं हो पाती है। शहर के पुराने वासिंदों का कहना है की यह नारकीय स्थिति मुख्य रूप से 2014 के बाद से प्रतिवर्ष भयावह रूप लेती जा रही है.इसका मुख्य कारण है की नगर निगम के अधिकारी अपनें वातानुकूलित कार्यालय में बैठ कर केवल कागजी आदेश/निर्देश अपनें मातहतों को जारी करते रहते है.अगर वे केवल अपनें निर्देशों/आदेशों के अनुपालन की भौतिक जाँच करते रहते तो और अयोग्य,अकर्मण्य,व भ्रष्ट कर्मियों पर कारवाई करते तो मुजफ्फरपुर जलजमाव से मुक्त हो सकता है.शहर के लगभग सभी मुहल्लों में कुछ लोगों द्वारा स्थायी रूप से वर्षों से नाले पर अवैध अतिक्रमण को निगम के अधिकारी और कर्मी संरक्षण देकर उनसे नियमित रूप से धन उगाही करते है.जिसके कारण अतिक्रमित नाले की सफाई नहीं होती और 1 घंटे की वर्षा में हीं जलजमाव हो जाता है.काश मुख्यमंत्री सुशासन बाबू, उप-मुख्यमंत्री रेणु देवी,बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ० संजय जायसवाल जी एवं नगर विकास मंत्री जी इसका संज्ञान लेते और मुजफ्फरपुर शहर को जलजमाव से मुक्त कराने में अपनी #अहम_भूमिका निभाते।
बजरंग सेना के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री- सह- बिहार प्रभारी ने मुख्यमंत्री नितिश कुमार उर्फ सुशासन बाबू से मुजफ्फरपुर के विभिन्न हिस्सों में हो रहे जल जमाव एवं इससे उत्पन्न संक्रमण के लिए राज्य सरकार और जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है तथा सम्बन्धित पदाधिकारियों को चेताया कि, अगर अविलंब इस समस्या से मुजफ्फरपुर वासियों लको निजात नहीं दिलाया गया तो मजफ्फरपुर मेंआगामी वार्डो के तथा पंचायतों में होने वाले चुनाव में राज्य सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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