किस मानसिकता की ओर हम सब जा रहे हैं। गलती किसकी है? संपादक की कलम से खास पेशकश
किस मानसिकता की ओर हम सब जा रहे हैं . गलती किसकी है हम अभिभावको की या आज के युवा वर्ग की .... वो छह महीने की बच्ची हो य़ा साठ साल की बुजूर्ग सभी को विकृत मानसिकता से देखना हमारे देश की तो संस्कृती नहीं रही है फिर ये कुकृत्य हो क्यू रहा है ..... हमने कभी इस विषय में सोचने की ज़रुरत ही महसूस नहीं की बस दोशियो को सजा दो यही दुहरते रहे . सभी मोबाइल और इंटरनेट को ही जिम्मेदार बताते हैं लेकिन मोबाइल की आदत बच्चो को लगवाता कौन है ... हम खुद ही क्युकी हमारे पास बच्चो के लिए वक़्त नहीं है कि उनके साथ बैठ कुछ बाते कर ले या उनकी सून ले . आज बच्चे रोते हैं तो हम उनको मोबाइल दे कर बेफिकर हो जाते हैं . अब तो बच्चो की परेशानी सुनने का भी समय नहीं किसी के पास तो संस्कार सिखाना तो बहोत दूर की बात हो गई . यदि हमारे माँ बाप के पास भी हमारे लिए वक़्त नहीं होता तो शायद आज हम जो गलत कह रहे वो हमारे लिए भी सही ही होता . माँ बाप परिवार ही यदि बच्चो के दोस्त बने तो शायद बच्चे कभी गलत संगत में जाए ही नहीं ......

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