*देशज भाषा को बोलने में गर्व की अनुभूति हो-प्रो. संजीव कुमार शर्मा*
*महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में 'हिंदी पखवाड़ा' का हुआ शुभारंभ*
प्रतीक कु. सिंह / मोतीहारी पु.च.
महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा 'हिंदी पखवाड़ा' का शुभारंभ हुआ। दिनांक 14 से 28 सितम्बर , 2021 तक आयोजित होने विभिन्न कार्यक्रमों का उद्घाटन चाणक्य परिसर स्थिति पंडित राजकुमार शुक्ल सभागार में हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने की। प्रति कुलपति प्रो. जी. गोपाल रेड्डी का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि आज हम देशज भाषा को बोलने में शर्म महसूस करते हैं जो भाषा और बोली कि सांस्कृतिक समृद्ध के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने गांधी जी की चर्चा करते हुए बताया की गांधी जी हिंदी भाषा को लेकर गौरव महसूस करते थे। हिंदी में वह अपने विचारों के सम्प्रेषण में प्रभावशाली भी होते थे। गुजराती मूल के होते हुए भी हिंदी के उत्थान के लिए गांधी जी का जो योगदान है वह अतुलनीय है। हम सभी को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए और हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए और अधिक प्रयत्न करना आवश्यक है। हमारी हिंदी भाषा में निखार तभी आएगा जब शिक्षक, लेखक और सांस्कृतिक कर्मी हिंदी की शुद्धता, परिशुद्धता और हिंदी को लेकर व्यवसाय को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि अपने आपको हिंदी भाषा के उत्सव तक ही सीमित नहीं रखना है बल्कि प्रतिज्ञा भी लेनी चाहिए की हमें अपनी हिंदी भाषा बोलने में शर्म नहीं गर्व महसूस हो जिससे हमारी हिंदी भाषा को ससम्मान और प्रतिष्ठा मिलें।
मुख्य अतिथि प्रो. मनोज दीक्षित, पूर्व- कुलपति, राममंनोहर लोहिया अवध, विश्वविद्यालय ने कहा की हमारी मातृभाषा कण-कण में दिखनी चाहिए। आज कल के बच्चों की अंग्रेजी भाषा के तरफ रुझान को देखते हुए उन्होंने कहा की विद्यालय, घर और कार्यस्थल हर जगह हिंदी भाषा के महत्व को उन्हें समझाना चाहिए। जिससे बालक अपनी भाषा को अधिक से अधिक प्यार और सम्मान दें। हमें अपनी भाषा को एकजुट होकर आगे बढ़ाना होगा जिससे यह प्रथम स्थान पर पूर्णतः स्थापित हो सके। सभी भाषाओ को सम्मान देते प्रो. दीक्षित ने हिंदी भाषी लेखकों को सहयोग देने की बात की।
विशिष्ट अतिथि प्रो. गोविन्द शर्मा , अध्यक्ष, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली ने कहा की हिंदी देशवासियो को आपस में जोड़ता है। अपनी राष्ट्रभाषा से हमारा गौरव जुड़ता हैं ना की किसी अन्य देश की भाषा से। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि हिंदी बस संयुक्त सचिव स्तर की भाषा रह गई है। देशज भाषा में हम आज भी गंभीर नहीं हैं जो की चिंतजानक हैं। हमें अपनी भाषा के प्रति जागरूक होना चाहिए और इस दिशा में विस्तृत शोध से हम अपनी मातृभाषा को उच्च स्थान पर पदस्थापित कर सकते है।
प्रति कुलपति प्रो. जी. गोपाल रेड्डी ने प्रत्येक भाषा के महत्व पर चर्च की। प्रो. रेड्डी ने मातृभाषा को सरल बताते हुए कहा की चाहे वह राज्य भाषा हो या अन्य भाषा हो उसे सीखने और समझने की उत्सुकता जगा के रखनी चाहिए। साथ ही अपनी अपनी मातृभाषा को हमेशा विशेष महत्व देनी चाहिए, जिससे हमारी पहचान मूल से बनें।
धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के अध्यक्ष और कार्यक्रम संयोजक प्रो. राजेन्द्र सिंह बडगुजर ने की। संचालन हिंदी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. गरिमा तिवारी ने की। कार्यक्रम में डीएसडल्ब्यु प्रो. आनंद प्रकाश, प्रो. प्रसून दत्त सिंह, प्रो. अजय कुमार गुप्ता, डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव सहित विभिन्न संकायों के शिक्षक शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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