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डेढ़ साल बाद कड़े शर्तों के साथ खुली इंडो-नेपाल बॉर्डर

 



 - यात्रियों के साथ व्यवसायियों में जश्न का माहौल


- नेपाल में भारतीयों का हुआ गर्मजोशी के साथ स्वागत


सिद्धान्त गुप्ता/ मोतिहारी


विगत डेढ़ वर्षो से बंद पड़े इंडो नेपाल बोर्डर को नेपाल सरकार ने खोलने का न‍िर्णय ल‍िया है, नेपाल की कैबिनेट में इसपर फैसला लिया गया है । लगभग डेढ़ वर्षों से भारत नेपाल सीमा पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा था, जिसका कई बार दोनों ही देश के लोगों व व्यवसायियों ने विरोध किया था। परन्तु अब मालवाहक वाहनों के साथ ही भारतीय दो और चार पहिया वाहनों को भी नेपाल में प्रवेश करने की अनुमति दे दी गई है। इससे व्यवसायी सहित आम लोगों में जश्न का माहौल है। नेपाल सिर्फ हमारा पड़ोसी देश ही नहीं है बल्कि इसके साथ, भारत के लोगों का रोटी, बेटी का संबंध है। इसलिए लोग पूर्व में काफी परेशानी झेलते हुए, पैदल ही बॉर्डर के किनारों के ग्रामीण क्षेत्रों से सफर तय करते थे, परन्तु अब 01 अक्टूबर को इंडो नेपाल बॉर्डर खुलने के साथ ही नेपाल के विभिन्न भंसार कार्यालय के पास भारतीय वाहनों की लंबी कतार लग गई। नेपाल सरकार ने बॉर्डर खोलने को लेकर कुछ शर्तें भी रखी हैं।भारतीय वाहनों को सीमा प्रवेश से पहले कोविड-19 का अनुपालन करना होगा। जिसमें 72 घंटे के अंदर कोविड-19 रिपोर्ट नेगेटिव होना जरुरी है। नेपाल इमिग्रेशन से सीसीएमसी फॉर्म भरने के बाद नेपाली कष्टम भन्सार कार्यालय में गाड़ी के ओरिजिनल कागजात की एंट्री करानी होगी। चार पहिया वाहनों के लिए 500 रुपये और दो पहिया वाहनों का डेढ़ सौ रुपये की प्राप्ति रसीद के साथ राजस्व वसूली की प्रज्ञापन पत्र देकर नेपाल में प्रवेश की इजाजत दी गई है। नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में भारतीय वाहनों के आवागमन के लिए बगैर किसी राशि की अदायगी के सुविधा पास यानी एंट्री पर्ची के साथ अनुमति भी दिया गया है।  इसके लिए सुबह 8:30 बजे से लेकर शाम को 5:00 बजे तक ही एंट्री होगी। इसके लिए नेपाल सरकार द्वारा भन्सार के पास ही एक एंट्री कार्यालय शुरू कर दिया गया है।

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