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नौ शक्तियों के मिलने एवं आराधना का पर्व है नवरात्रि।।

 




भगवती का आगमन डोली पर होगी जबकि प्रस्थान गज पर करेगी ।।


7 अक्टूबर से शुरू होगी शारदीय नवरात्र।।


घोड़ासहन पूर्वी चम्पारण:माँ भगवती के नौ शक्तियों के मिलने एवं आराधना के पर्व को नवरात्रि कहते हैं।'नवरात्र' शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से लेकर महानवमी तक किए जाने वाले पूजन,जाप,उपवास का प्रतीक है।इन नौ दिनों में माँ भगवती के नौ रूपों की भक्ति करने से हर मनोकामनाएं पूर्ण होती है;उपयुक्त बाते माता अन्नपूर्णा ज्योतिष परामर्श केंद्र घोड़ासहन के संचालक आचार्य आलोक पाण्डेय ने कही.आगे बताया कि देवीपुराण के अनुसार एक वर्ष में चार नवरात्रों का उल्लेख एवं विधान मिलता है।अर्थात् प्रथम नवरात्र चैत्र में,दूसरी नवरात्र आषाढ़ में,तीसरी आश्विन में और चौथी माघ मास में होती है।वैसे जनमानस में सबसे प्रमुख आश्विन मास की नवरात्र जिन्हें शारदीय नवरात्र तथा दूसरी प्रमुख नवरात्र चैत्र मास की नवरात्र जिन्हें वासन्तीय नवरात्र के नाम से जाना जाता है।इसके अतिरिक्त आषाढ़ और माघ मास की नवरात्र को गुप्त नवरात्र के नाम से जाना जाता है,क्योंकि,इनदोनों के बारे में अधिक लोगों को जानकारी नहीं होती है। कलयुग में माता आदिशक्ति एवं आदिदेव महादेव की प्रधानता है।इस वर्ष माता आदिशक्ति माँ दुर्गा की पूजा अर्थात् शारदीय नवरात्र 07-अक्टूबर-2021 गुरुवार से 15-अक्टूबर-2021 शुक्रवार तक मनाई जाएगी। हालांकि इस वर्ष षष्ठी तिथि की क्षय होने से 07-अक्टूबर को कलश-स्थापना, 08-अक्टूबर को रेमन्त पूजन,11-अक्टूबर को गजपूजन एवं बिल्वाभिनिमन्त्रण,12-अक्टूबर को नवपत्रिका-प्रवेश पूजन,सप्तमी पूजन एवं नेत्रावलोकन,13-अक्टूबर को महाष्टमी व्रत एवं रात्रि में निशापूजन,14-अक्टूबर को महानवमी व्रत,कुमारी-कन्या पूजन,एवं महानवमी हवन

15-अक्टूबर को विजयादशमी, देवी विसर्जन,नीलकंठ दर्शन,शमीपूजन,अपराजिता पूजन होगा। 07-अक्टूबर गुरुवार को माता भगवती का आगमन डोला पर होगी जिसका फल अशुभकारी होगा तथा प्रस्थान 15-अक्टूबर शुक्रवार को गज पर होगा जिसके फल में शुभ वृष्टि का योग है। घर परिवार में अनिष्ट दूर करने,मनोवांछित फल प्राप्ति व वैश्विक आपदा कम करने के लिए कलश-स्थापना और माँ भगवती की पूजन,अर्चना करना चाहिए।।

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