बिहारशरीफ में इलाज के अभाव में बुजुर्ग की मौत, इमरजेंसी वार्ड में 16 घंटे बेड पर पड़ा रहा शव, सूचना के बाद भी नहीं पहुंची पुलिस
बिहारशरीफ सदर अस्पताल में रोगियों के इलाज में लापरवाही की खबरें आए दिन आती रहती हैं। मगर कर्मियों पर कार्रवाई नहीं होने से उनका मनोबल बढ़ता ही जा रहा है। इस बार मानवता की सारी हदें पार करने वाला वाकया सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में हुआ। वहां दो दिन पहले सड़क पर पड़े बुजुर्ग को किसी ने मानवता दिखाते हुए अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करा दिया था। इलाज तो दूर कोई कर्मी बुजुर्ग को देखने भी नहीं गया। युवक ने उसे जिस बेड पर भर्ती कराया था, दो दिनों तक बुजुर्ग उसी बेड पर कराहते रहे। रविवार की देर रात उनकी मौत हो गयी।
नाइट ड्यूटी में तैनात कर्मियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। शिफ्ट चेंज होने के बाद जब दूसरे स्वास्थ्यकर्मी चादर बदलने गए तो वृद्ध को मृत पाया। बावजूद, सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बेड पर 16 घंटे तक वृद्ध का शव पड़ा रहा। सोमवार को शाम चार बजे वहां मीडियाकर्मियों के पहुंचने पर आनन-फानन में स्वास्थ्यकर्मियों ने शव को वहां से हटाया। मामले की जानकारी मिलते ही सीएस डॉ. सुनील कुमार ने लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की। नाइट ड्यूटी में तैनात डॉ. नृपेंद्र कुमार, जीएनएम संगीता कुमार, चतुर्थवर्गीय कर्मी अशोक कुमार व दिनेश चौधरी पर कार्रवाई की है। उनसे शोकॉज मांगा है।
हद तो तब हो गयी जब सोमवार की सुबह साढ़े आठ बजे स्वास्थ्यकर्मियों ने पोस्टमार्टम के लिए बिहार थाना की पुलिस को सूचना दी। बावजूद, वहां से कोई जवान तक यहां नहीं पहुंचा। करीब सात घंटे बाद वरीय पदाधिकारी की डांट के बाद आनन-फानन में नगर थाना पुलिस वहां पहुंची। इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गयी। सीएस डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि ड्यूटी में तैनात कर्मियों की लापरवाही दिख रही है। जांच शुरू हो चुकी है। चार से शोकॉज मांगा गया है। नगर थानाध्यक्ष संतोष कुमार ने बताया कि बुजुर्ग की पहचान नहीं हो पायी है। किसी अंजान शख्स ने सड़क पर तड़पता देख अस्पताल में भर्ती कराया था। पोस्टमार्टम के बाद शव को पहचान के लिए सुरक्षित रखा गया है।
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