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इंडो-नेपाल बॉर्डर: क्रॉस बॉर्डर अपराधियों व तस्करों पर कसेगा लगाम, रिश्ते होंगे और प्रगाढ़, चल रही है ये तैयारी

 




भारत में अपराध कर नेपाल भाग जाने व नेपाल से भारत आकर छिप जाने वाले अपराधियों की अब खैर नहीं। इसके साथ ही भारत-नेपाल के सीमा से चोरी छिपे तस्करी करने वाले तस्करो पर भी अब लगाम लगाने की पुरी तैयारी दोनों देशों के अधिकारियों ने कर ली है। तथा इसको लेकर एक विस्तृत रणनीति भी तैयार की गयी है ताकि अधिक से अधिक प्रभावी तरीके से इसपर लगाम लगाया जा सके।

अपराधियों व तस्करों पर नकेल कसने को लेकर एसएसबी 21वी वाहिनी तथा नेपाल के नवल परासी के सैन्य अधिकारियो की एक बैठक में वाल्मीकिनगर में आयोजित की गयी। गंडक बराज कैंप में शनिवार को आायेाजित यह बैठक कमांडेंट स्तरीय थी। बैठक की अध्यक्षता एसएसबी 21 वी वाहिनी के कार्यवाहक कमांडेंट श्रीप्रकाश ने किया।

संदिग्धों से होगी पूछताछ

बैठक में मुख्य रुप से कहा गया कि भारत- नेपाल में मैत्री संबंध बना रहेगा। साथ में दोनों देशों के अधिकारी आपास में मिलकर तस्करी,वन तस्करी, शराब तस्करी, मानव व्यापार तस्करी व अवैध गतिविधियों पर नजर रखेंगे। ताकि तस्करी पर पूर्णत: रोक लगाया जा सके। साथ में कहा गया है कि अगर कोई भी संदेह के घेरे में आ रहा है तो उसे तुरंत पकड़ कर पूछताछ किया जाए। ताकि अपराधियों पर नकेल कसा जा सके।

बैठक में कहा गया है कि वैसे लोगों पर भी नजर रखना हैं जो अपराधी प्रवृत्ति के हैं। बैठक में नकेल कसने के लिए कई रणनीति बनाई गई। इस बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों ने आपसी सहयोग बनाये रखने व अपराधियों की सूची आदान प्रदान के साथ आपसी तालमेल बनाए रखने की बात को रखा। जिसपर दोनो देशो के अधिकारियों के बीच सहमति बनी।

मौके पर एसएसबी के कार्यवाहक कमांडेंट श्रीप्रकाश ,द्वितीय कमांडेंट 65 वी वाहिनी के पंकज डंगवाल, 21 वी वाहिनी के एसएसबी डिप्टी कमांडेंट उमाशंकर नासाना, गंडक बराज पर तैनात इंस्पेक्टर कालिदास आदि के अलावा नेपाल की ओर से एपीएफ के एसपी महेश अधिकारी, बाल्मीकि आश्रम के एपीएफ इंस्पेक्टर दीवेंद्र महाराजन, त्रिवेणी के एपीएफ इंस्पेक्टर संतोष थापा, सुस्ता के एपीएफ इंस्पेक्टर हरिप्रसाद रमण सहित कई एपीएफ के अधिकारी व जवान बैठक में उपस्थित रहे।

भारत-नेपाल के रिश्ते होंगे और प्रगाढ़ 

वाल्मीकिनगर मे आयोजित नेपाल के अधिकारी महेश अधिकारी ने कहा कि भारत-नेपाल के बीच सदियों से पुरानी सांस्कृतिक साझेदारी है। हमें इसे वर्तमान में और अधिक मजबूत एवं प्रगाढ.बनाने की आवश्यकता है। ताकि दूसरा कोई इसका लाभ न लें सके।


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