Bihar Weather: तेजी से बदल रहा है मौसम, आसमान में छाया धुएं और धुंध का कॉकटेल, लोगों की फूल रही सांसें
दिन ढलने के साथ ही रात का पारा देह में सिहरन पैदा कर रहा है तो अलसुबह में कोहरे में समा रहा धूल, धुआं लोगों की सांसें फूला रहा है। कोहरे के साथ हवा में मौजूद प्रदूषण लोगों के लिए और घातक हो रहा है। हवा में मौजूद धूल के बारीक कण और जहरीली गैसों के कारण कोहरे की रंगत बदलती दिख रही है। विशेषज्ञ इसे स्मॉग कह रहे हैं।
आलम यह है कि अलसुबह में भागलपुर शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) औसतन 180 से 190 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर के बीच और दिन बढ़ने के बाद 160 से 165 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के बीच रह रहा है। मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है। सुबह और शाम को आसमान में धुंध और धुएं का कॉकटेल छा जा रहा है। इस कारण सांस के मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के टीबी एंड चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि स्मॉग के कारण सांस के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। ओपीडी में सांस के मरीजों की संख्या में 25 प्रतिशत का इजाफा पिछले एक हफ्ते में हुआ है। इसमें अस्थमा, एलर्जी और सीओपीडी के मरीज शामिल हैं। वहीं मेडिसिन इंडोर में भर्ती कुल मरीजों में से 30 प्रतिशत मरीजों को सांस की तकलीफ है।
समय से लें सांस के मरीज दवाएं
टीबी एवं चेस्ट विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शांतनु कुमार घोष ने बताया कि इस मौसम में सांस के मरीजों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। अस्थमा के मरीज इनहेलर ना छोड़ें और समय से दवाएं लें। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि ठंड में बच्चों की सेहत का खास ख्याल रखें। तड़के और देर शाम को घर से बाहर बच्चों को निकालने से परहेज करें। सर्दी, खांसी, जुकाम होने पर बच्चों को डॉक्टर से इलाज कराएं। जिन बच्चों को पहले से सांस की तकलीफ हो, अस्थमा या एलर्जी हो उनका खास ध्यान रखें।
30 प्रतिशत मरीजों में बीपी की शिकायत
मायागंज अस्पताल के वरीय फिजीशियन डॉ. राजकमल चौधरी ने बताया कि सांस के मरीजों के साथ बीपी (ब्लड प्रेशर) के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। करीब 30 प्रतिशत मरीज बीपी से पीड़ित हैं, जो इलाज के लिए ओपीडी में पहुंच रहे हैं। ठंड में बीपी बढ़ने का कारण लोगों का ब्लड प्रेशर ऊपर-नीचे होता है। ब्लड सप्लाई के लिए हार्ट पर ज्यादा दबाव पड़ता है। आर्टरीज और हार्ट पर ज्यादा दबाव पड़ने के कारण ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है। इस वजह से लोग बीपी के शिकार होते हैं। यही नहीं, हार्ट रेट बढ़ने, हार्मोनल बदलाव, एनवायरमेंटल बदलाव, डाइटरी हैबिट, नमक ज्यादा खाने और बहुत ज्यादा इमोशनल होने से भी बीपी बढ़ती है।
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