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गोपालगंज: दो कश्मीरी युवकों के साथ जफर ने बंगाल, बिहार और दिल्ली में फैला रखा था नेटवर्क, आकाओं को देता था इंडियन सिम कार्ड

 




टेरर फंडिग में गोपालगंज जिले के मांझागढ़ के पथरा से दबोचे गये जफर अब्बास ने दो कश्मीरी युवकों के साथ मिलकर अपना नेटवर्क पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली के साथ कई शहरों में भी फैला रखा था। सूत्रों की मानें तो वह देश विरोधी गतिविधियों में संलग्न था। वह इंडियन मोबाइल नंबर को पाकिस्तान के अपने आकाओं को उपलब्ध कराता था। 

व्हाट्सएप नंबर से बात होती थी। कश्मीर के बारामुला के मुनीर अहमद उर्फ मुनीर अहमद चौधरी तथा कुपवाड़ा के अर्शिद अहमद टोंच के साथ मिलकर वह आंतकवादी वारदात की योजना बना रहा था। वह सुरक्षा एजेंसियों की आंख में धूल झोंकने के लिए संदेह होने पर मोबाइल नंबर को डिएक्टिवेट करा देता था। 

विगत 6 दिसंबर को एनआईए ने साक्ष्य जुटाने के बाद जफर सहित इसके दोनों कश्मीरी साथियों पर भी मामला दर्ज किया था। जफर के लैपटॉप एवं मोबाइल के सीडीआर के आधार पर उसके लोकल नेटवर्क को भी एनआईए सहित अन्य सुरक्षा एजेंसिया खंगाल रही हैं। उसके नेटवर्क में सीवान के साथ गोपालगंज के कुछ और युवकों के जुड़े होने के संकेत मिले हैं। 

इस नेटवर्क में बिहार, बंगाल दिल्ली सहित कुछ अन्य शहरों के भी युवकों के जुड़े होने की जानकारी भी सुरक्षा एजेंसियों को मिली है। उसके खाते में लेन-देन की जांच की जा रही है। उसकी पैतृक संपत्ति का आकलन किया जा रहा है। कई एजेंसियां इसमें जुटी हुई है। आर्थिक अपराध इकाई को भी यह मामला सौंपने की तैयारी है। 

ज्ञात हो कि जफर अपने गांव में तीन मंजिला मकान का निर्माण करा रहा है। खाते में करोड़ों के ट्रांजेक्शन की बात भी सामने आई है। ज्ञात हो कि पिछले सात दिसंबर को एनआईए ने  पाकिस्तानी आतंकवादियों से संपर्क व टेरर फंडिंग मामले में जिले के मांझागढ़ थाने के पथरा निवासी जफर अब्बास को गिरफ्तार किया था। दो लैपटॉप, छह मोबाइल व छह सिम भी बरामद किए गए थे।


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