शराबबंदी पर 7 घंटे चली मैराथन बैठक, जानिए सीएम नीतीश के 10 बड़े फैसले
शराबबंदी कानून को और प्रभावी बनाने के लिए गांव के चौकीदार से डीजीपी तक की जवाबदेही तय कर दी गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि शराबबंदी का किसी भी स्तर से उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को सात घंटे चली समीक्षा बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। हम यहां आपको शराबबंदी की समीक्षा बैठक के दौरान दस प्रमुख फैसलों के बारे में बता रहे हैं।
1- शराबबंदी में लापरवाही बरतने वाले थानेदारों को अगले दस सालों तक थाने में ड्यूटी नहीं दी जाएगी। अगर उनकी संलिप्तता पाई जाती है तो उन्हें बर्खास्त करने तक की कार्रवाई की जाएगी।
2- सेंट्रल टीम राज्यभर में छापेमारी करेगी और अगर वह कहीं भी शराब बरामद करती है तो संबंधित थानेदार को तत्काल सस्पेंड कर दिया जाएगा।
3- हर 15 दिनों पर डीएम और एसपी शराबबंदी की समीक्षा करेंगे। डीजीपी, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, उत्पाद आयुक्त और आईजी मद्य निषेध हर दूसरे दिन समीक्षा करेंगे।
4- 26 नवंबर को मद्य निषेध दिवस के दिन सभी मंत्री, जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और कर्मी शराब नहीं पीने और किसी को नहीं पीने देने की फिर से शपथ लेंगे।
5- होम डिलीवरी पर पुलिस और संबंधित पदाधिकारियों की पैनी नजर होगी। होम डिलीवरी करने वालों की पहचान कर उनपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
6- गांवों में शराब की बिक्री और इसके धंधे की सूचना देने की बुनियादी जिम्मेदारी चौकीदारों और दफादारों की होगी। वे संबंधित थाने को शराब की सूचना देंगे। अगर, इस कार्य में वे कोताही बरतते हैं तो उन पर भी कार्रवाई होगी।
7- सरकारी पदाधिकारी और कर्मचारी के स्तर पर शराबबंदी कानून का उल्लंघन किया जाता है तो उन्हें किसी भी हालत में छोड़ा नहीं जाएगा। कड़ी-से-कड़ी सजा दी जाएगी।
8- जिन थानों में अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है उनकी पहचान कर अध्ययन किया जाएगा। लापरवाही साबित होने पर उनपर कार्रवाई होगी।
9- सीमावर्ती इलाके में शराब की तस्करी का जो रूट है, उस पर विशेष निगरानी होगी और संबंधित इलाके को सील किया जाएगा।
10- कॉल सेंटर पर सूचना मिलती है तो तत्काल कार्रवाई होगी। इंटेलीजेंस को और प्रभावी बनाया जाएगा।
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