बिहार पंचायत चुनाव: स्थानीय निकाय में बदलाव की बयार, पुराने पिछड़े, ज्यादातर नए चेहरों ने दर्ज की जीत
बिहार के स्थानीय निकाय में बदलाव की बयार बही। पुराने चेहरे पिछड़ गए और नये आगे निकल गए। पंचायत चुनाव के छठे चरण की मतगणना के बाद जारी परिणाम में अधिकतर नये चेहरों ने जीत दर्ज की। गोपालगंज के उचकागांव की दस पंचायतों के सभी मुखिया चुनाव हार गए तो फुलवरिया की 12 पंचायतों में दस में नये चेहरों को कुर्सी मिली।
रोहतास के नोखा में 13पंचायतों में 10 नये चेहरे जीते। यहां से प्रमुख व उपप्रमुख भी चुनाव हार गए। सारण के दिघवारा की दस पंचायतों में नौ नये मुखिया बने। जिप के लिए भी नये चेहरे पर जनता ने भरोसा जताया। सीवान के बड़हरिया में 18 में 14 नये चेहरे की ताजपोशी हुई।
नवादा के सिरदला की 15 पंचायतों में 13 नए मुखिया को पंचायत सरकार की कमान मिली है। वहीं नवादा की जिप अध्यक्ष भी चुनाव हार गईं तो बिहारशरीफ में जिप की पूर्व अध्यक्ष ने अपनी कुर्सी गंवा दीं। भोजपुर जिले के उदवंतनगर व सहार प्रखंडों में मुखिया के पदों पर 77 प्रतिशत नये चेहरे जीते तो जिला परिषद क्षेत्रों में 75 फीसदी नये चेहरे विजयी हुए।
पंचायत समिति सदस्य व सरपंच के पदों पर भी बदलाव साफ नजर आया। वैशाली के राजपाकर में 90 फीसदी नई चेहरे जीते। इधर औरंगाबाद के गोह में 20 पंचायतों में से 16 मुखिया चुनाव हार गए। वहीं दिग्गज जिप प्रत्याशियों को भी इस बार हार का सामना करना पड़ा और सभी सीटों पर नए चेहरे काबिज हुए हैं।
इधर बक्सर के सदर प्रखंड की 15 पंचायतों में से महज तीन पंचायतों के मुखिया ही किसी तरह अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे जबकि जिला परिषद सदस्य की दोनों सीटों पर नए प्रतिनिधियों को जनता ने मौका दिया है। दूसरी तरफ बेगूसराय, कैमूर में भी जनता ने काफी उलटफेर किया और स्थानीय सरकार की कमान बदल दी।
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