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काली कमाई के फेर में मणि रंजन खुद तो नपे ही, भाई पर भी लटका दी तलवार

 



काली कमाई के मामले में एसवीयू की जद में आए सब-रजिस्टार मणि रंजन खुद तो नपे ही अपने बड़े भाई पर भी कार्रवाई की तलवार लटका दी। अगमकुआं के बजरंगपुरी स्थित जिस फ्लैट से लाखों रुपए नगद मिले हैं। वह फ्लैट मणि रंजन का है पर वहां रहते उनके बड़े भाई हैं। भारी मात्रा में कैश की बरामदगी ने उनके भाई को भी संकट भी डाल दिया है।

एसवीयू के सूत्रों के मुताबिक, मणि रंजन का फ्लैट होने के चलते उसकी तलाशी ली गई, हालांकि वहां उनके बड़े भाई रहते हैं। चूंकि कैश बरामदगी वहां से हुई है लिहाजा इसकी आंच उनके भाई पर भी आएगी। फ्लैट से बरामद राशि को मणि रंजन अपना मान लेते हैं तो ठीक है नहीं तो उनके भाई को भी नगद बरामदगी को लेकर अभियुक्त बनाया जाएगा। साथ ही उनसे भारी मात्रा में बरामद कैश के श्रोत का भी पुख्ता आधार दिखाना होगा। वहीं मणि रंजन नगदी को अपना बताते हैं तो भी भ्रष्टाचार में उनका साथ देने को लेकर भाई पर कानूनी कार्रवाई होगी।

जांच के दौरान जमीन-जायदाद और वित्तीय संस्थानों के साथ रियल स्टेट में लाखों-करोड़ों के निवेश के जो दस्तावेज मिले हैं उससे मणि रंजन के साथ उनके करीबी रिश्तेदारों पर भी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक मणि रंजन के बड़े भाई पटना में एजी ऑफिस में कार्यरत हैं। जब एसवीयू के पटना स्थित फ्लैट में छापेमारी की तो इसकी खबर मिलने पर मीडियाकर्मी वहां कवरेज करने पहुंच गए। इसपर भाई ने तेवर दिखाए और एसवीयू की टीम से कहा कि हमारे घर में मीडिया कर्मी कैसे आ गए। इन्हें बाहर निकालिए।

एसवीयू ने हाथ खड़े कर दिए, तब जाकर धीरे-धीरे वह भी शांत पड़ गए। इसके अलावा फ्लैट से भारी मात्रा में कैश की बरामदगी को लेकर भी उनके घर से एसवीयू के अधिकारियों को फोन पर तरह-तरह की दलील दी गई पर उनकी एक न चली।

11 वर्षों की नौकरी में कर डाली मोटी कमाई

एसवीयू के मुताबिक मणि रंजन वर्ष 2010 से इस नौकरी में हैं। इतने कम समय में ही उन्होंने एक के बाद एक कई संपत्तियां अर्जित कर लीं। संपत्तियों की फेहरिस्त और निवेश के प्रमाण देखकर जांच अधिकारी भी हैरत में पड़ गए।

मणि रंजन ने मॉल में दो समेत पांच दुकानें खरीदी

विशेष निगरानी इकाई ने समस्तीपुर के सब रजिस्ट्रार मणि रंजन के तीन ठिकानों पर छापेमारी की। इसमें पता चला कि मणि रंजन ने मुजफ्फरपुर के पारस मॉल में 22 लाख रुपये में दो दुकान खरीद रखी है। इसके अलावा कटिहार में सबसे अधिक निवेश की बात सामने आई है जिसकी जांच जारी है। फिलहाल कटिहार में 3 प्लॉट और 3 दुकान खरीद की जानकारी एसवीयू को मिली है। लाखों के जेवरात, कई पासबुक, फिक्स डिपोजिट, कई बीमा कंपनियों में निवेश के कागजात भी हाथ लगे। समस्तीपुर आवास की तलाशी में 8 लाख जमा होने के कागजात मिले। उन्होंने, पत्नी व रिश्तेदारों के साथ निवेश और फर्जी कंपनी बनाकर काले कमाई को वैध करने का प्रयास किया। यहां तक की चालक के नाम पर 2 लाख का आयकर रिटर्न भरते आ रहे हैं।


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